गावों से लेकर शहर में भी बेल की बहार पेड़ों में लदे फल और फूल

तेन्दूखेड़ा। बेल के पेड़ को धार्मिक दृष्टि से बहुत उपयोगी माना जाता है साथ ही इसका फल स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभप्रद होता है इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर तक में बेल के फल की बहार है गांव के खेतों में और शहर में लोगों के घरों में लगे बेल के पेड़ फूलों से लदे हुए हैं जो लोगों को अपनी ओर अकर्षित कर रहे हैं आयुर्वेद में बेल को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद माना गया है आयुर्वेद के अनुसार पका बेल फल मधुमेह रुचिकर पाचक तथा शीतल माना गया है जानकारों की माने तो बेल फल गर्मियों के दिनों में बहुत ही फायदेमंद है कच्चा बेलफल रुखा पाचक वात-कप शूलनाशक व आतों के रोगों में उपयोगी होता है डॉक्टर बताते हैं कि उदर विकारों में बेल फल रामबाण दवा है डॉक्टरों ने अनुसार अधिकांश रोगों की जड़ उदर विकार ही है गर्मियों में बेल का फल सेवन करने से बारिश में होने वाली बीमारियों का खतरा कम हो जाता है बेल के सेवन से आंव संग्रहणी बीमारी को लाभ मिलता है गर्मियों में प्रायः अतिसार की वजह से दस्त लगने लगते हैं ऐसे में कच्चे बेल फल को आग में भून कर रोगी को खिलाना फायदा करता है लू लगने पर मिश्री मिलाकर बेल का शरबत पिलाने से फौरन राहत मिलती है जंगलों से गायब हो रहा बेल: दसक पहले तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र के जंगलों में जंगली बेल बहतायत मात्रा में हुआ करते थे जिसे आदिवासी लोग इस फल को पकने के बाद बाजारों में बेचते थे जिसमें अच्छी आय होती थी लेकिन वनों से पेड़ों की अधाधुंध हुई कटाई का असर बेल के पेड़ों पर भी पड़ा है दसरी ओर गर्मियों के सीजन में हर वर्ष जंगलों में लगने वाली आग से भी वृक्ष लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं व्यापारी बताते हैं कि क्विंटलों की मात्रा में बेल कटनी दमोह जबलपुर नरसिंहपुर सागर छतरपुर एवं अन्य जिलों में मालवाहकों से भेजा जाता था लेकिन अब यह काम पूरी तरह से बंद हो चुका है हा गावों में जरूर बेल मिल जाते हैं लेकिन जंगल के बेल की अच्छी कीमत होती थी जो गांव के बेल में नहीं मिलती थी